के वि अस के अनुसार
सत्र के प्रारंभ में धीमी गति से सीखने वाले विद्यार्थियों (Slow Bloomers) की पहचान की गई तथा उनके लिए आवश्यक उपचारात्मक कार्रवाई की गई।
आवश्यकता के अनुसार उपचारात्मक कक्षाओं (Remedial Classes) का आयोजन किया गया।
अधिक अंकभार वाले विषयों/अध्यायों तथा विद्यार्थियों के कमजोर क्षेत्रों पर बार-बार चर्चा एवं अभ्यास कराया गया।